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कठोर वचन त्यागने और मधुर वचन बोलने से दुनिया वश में होती है:- दीदी प्रज्ञा पाराशर

ग्राम मलगांव में प्रज्ञा पुराण कथा के चौथे दिन प्रज्ञा दीदी ने कहा

”कठोर वचन त्यागने और मधुर वचन बोलने से दुनिया वश में होती है – बहन प्रज्ञा पाराशर“

हमारे दुखों का कारण हमारे कठोर वचन, अनर्गल इच्छाएं और दुर्व्यवहार है। व्यक्ति स्वयं बदलने के बजाय दूसरों को बदलने का प्रयास करता है। जो कि एक अत्यंत कठिन प्रयास है। किसी को बदलना कठिन है, किन्तु स्वयं को बदलना आसान है। हम दूसरों से जैसी अपेक्षा करते हैं वैसे पहले स्वयं बन जाये तो दुनिया सरल लगने लगेगी। दुनिया को वश में करने के पहले हमारे अंदर व्यवहार कुशलता, प्रेम और सहकार की भावना आनी चाहिए।
यह चिंतन ग्राम मलगांव में पांच दिवसीय प्रज्ञा पुराण कथा के चौथे दिवस प्रज्ञा पुराण कथा टोली नायक बहन प्रज्ञा पाराशर ने श्रोताओं को श्रवण कराया। उन्होंने महाकवि तुलसीदास जी के संदेश का उदाहरण प्रस्तुत करते हुये कहा कि दुनिया को वश में करना है तो हमें पहले कठोर वचनों का त्याग करना होगा और मधुर वचन बोलना अपना व्यवहार में लाना होगा। इसकी शुरुआत गृहस्थ जीवन में रहकर अपने परिवार से करना होगा। सहकार और सद्भाव को व्यवहार में लाना होगा। अधिकारों की अपेक्षा कर्त्तव्यों का पालन करना होगा। क्योंकि अधिकार की लड़ाई परिवार के बिखराव का कारण बनती है।
पावन प्रज्ञा पुराण कथा के चौथे दिवस 150 परिजनों ने आत्म कल्याण के लिये अपनी इच्छा को सद्गुरु पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के चरणों में समर्पित कर उनके अनुशासन को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हुये गायत्री महामंत्र की गुरु दीक्षा ग्रहण की। गायत्री उपासना से आत्मशक्ति का विकास होता है तथा ऐसी गुप्त शक्तियां जाग्रत होती है जो सांसारिक जीवन संघर्ष में अनुकूल प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है। जिसके कारण व्यक्ति उन्नति करता है और वैभवशाली बनता चला जाता है। उपासना का अर्थ है ईश्वर के पास बैठना और दोनों के बीच की दुरी को कम करना। ईश्वर से निकटता इतनी बढ़ानी चाहिए कि आत्मा परमात्मा में तल्लीन हो जाय और उस परमज्योति से अपना कण-कण जगमगाने लगे। 31 भाई बहनों का यज्ञोपवीत संस्कार भी संपन्न हुआ

:- रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा

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